आरएसएस पदाधिकारी कानिटकर अतिथि, कुलपति हो गए गायब

नवीन शिक्षा नीति पर आयोजित थी कार्यशाला, पहले दी थी आने की अनुमति 
उज्जैन. सत्ता का रंग और असर गजब ही है, कि इस रंग की छाया में आने वाले शिक्षक और विद्वान भी रंग बदलने में  माहिर हो जाते है। कुछ ऐसा ही वाक्या विक्रम विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय शिक्षा मंडल के तत्वाधान में नवीन शिक्षा नीति विषय आयोजित (30 नवंबर) कार्यशाला में हुआ। जब आरएसस विचारधारा का कार्यक्रम होने के चलते कुलपति डॉ. बालकृष्ण शर्मा  कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इन्होंने अपनी जगह अन्य प्रोफेसर को भेज दिया। कार्यशाला से कुलपित मुकुल कानिटकर के बड़े अपमान के रूप में देखा जा रहा है। बता दे कि कुलपति पूर्व में संघ से जुड़े संगठन और सम्पर्क का लाभ लेते रहे है।


क्या है मामला
विक्रम विवि में भारतीय शिक्षा मंडल संगठन के तत्वाधान कार्यशाला का आयोजन था। आयोजक संस्था आरएसएस से जुड़ी है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संस्था के संगठन महामंत्री व आएसएस से जुड़े मुकुल कानिटकर थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति को करनी थी। अकादमिक कार्यक्रमों की परंपरा भी यही है। कुलपति ने अपना समय भी कार्यक्रम के लिए दिया, लेकिन ऐनवक्त पर किसी ने कुलपति किसी ने प्रदेश में कांग्रेसी शासन होने की जानकारी से पुन: याद करवा दिया। फिर क्या था कुलपति को आकस्मिक व्यस्तता आ गई। 


साथी शिक्षक की शिकायत कर खुद मुसीबत में फंसी महिला प्रोफेसर     
 


शासन स्तर पर रूकी है जांच
विक्रम विवि के कुलपति डॉ. बालकृष्ण शर्मा धारा 52 के तहत कुलपति बने। इन्होंने खुद को शैक्षणिक नियुक्ति व प्रोफेसर पद पर पदस्थापना बताई थी। इसके बाद कुलपति की नियुक्ति की जांच शासन स्तर पर शुरू हुई, लेकिन एकाएक जांच रूक गई। बता दे कि धारा 52 के तहत कुलपति नियुक्ति के लिए राजभवन और शासन में टकराव हुआ। इस बीच बालकृष्ण शर्मा प्रभारी कुलपति थे। इन्होंने एक स्थानीय विधायक और कुछ प्रोफेसरों की मदद से कांग्रेस व बीजेपी दोनों संगठन को साध लिया, लेकिन कार्यशाला में हुई घटना को मुकुल कानिटकर के बड़े अपमान के रूप में देखा जा रहा है।