रोज रोज पूड़ी खाने से कोई बीमार न हो, तो दाल रोटी सब्जी के साथ बनता है खिचड़ी दलिया  
रोज रोज पूड़ी खाने से कोई बीमार न हो, तो दाल रोटी सब्जी के साथ बनता है खिचड़ी दलिया  

 

स्वर्णिम भारत मंच की भोजन शाला सतत बारह घंटे चलती है 

उज्जैन। स्वर्णिम भारत मंच आपात कालीन परिस्थिति में हमेशा से आम आदमी की मदद करता आया है ।लेकिन लॉक डॉउन की  बड़ी लंबी अवधि हो चुकी है। हर कोई आज परेशान है। उज्जैन में कई संस्थाएं भोजन वितरण कर रही है पर लोग रोज रोज पुड़ी खा खा कर ऊब चुके है। कुछ तो बीमार भी हो रहे है। इसलिए स्वर्णिम भारत मंच की भोजन शाला में  दाल रोटी सब्जी चावल दलिया बनता है। कभी कभी ही पुड़ी बनाई जाती है। हमे लोग शिकायत करते है कि पूडी खा खा कर बीमार हो जाएंगे। हर कोई तो पुड़ी ही लाता है बच्चे उल्टी करते है पर जब उन्हें पता चलता है कि रोटी सब्जी के साथ खिचड़ी भी  है तो वे खुश होकर ले लेते है।

स्वर्णिम भारत मंच का मकसद है कि लोग ठीक से खाना खा सके व बीमार न पड़े  उंन्हे स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिले इसका ध्यान रखते हुए स्वर्णिम भारत मंच प्रतिदिन अपनी भोजन शाला में दाल रोटी सब्जी दलिया खिचड़ी  बनाता है। जो लोग खाना बनाते है वे अलग अलग शिफ्ट में सेवा दे रहे है। स्वर्णिम भारत मंच  के संयोजक दिनेश श्रीवास्तव बताते है कि ऐसे तो स्वर्णिम भारत मंच  एक अक्टूबर 2019  से निरंतर वृद्धजनों दिव्यांगों व असहाय लोगों के लिए निशुल्क भोजन सेवा का संचालन करता आ रहा है जिसमे हम साधा भोजन ही वृद्धजनो को भेजते है  पर ज्यादा संख्या में भोजन बनता है तब रोटी बनाने में बहुत देर लगती है लेकिन लॉक डॉउन की अवधि अधिक हो जाने से लोग रोज रोज पुड़ी नही खा सकते है  हमे कठनाई भी बहुत आती है क्योंकि  स्वर्णिम भारत मंच  के पास सीमित संसाधन  पर हमारा संतुलित भोजन की व्यवस्था देने का दृढ निश्चय कभी टूटा नही है। 

 

12 घण्टे बनता रहता है भोजन

 स्वर्णिम भारत मंच की भोजनशाला में सुबह 9:00 बजे से भोजन बनने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो देर रात तक  बनने का क्रम चलता रहता है।

सेवा देने वाले पांच 5 घंटे की शिफ्ट में सोश्यल डिस्टेंसिंग का  पालन करते हुए सहयोग कर रहे हैं। कई बार देर तक 25 - 30 लोगो के भोजन की सूचना आ जाती तो  तत्काल तैयार करके पहुँचाना पड़ता है  ताकि कोई भूखा न सोएं  हमेशा शुद्ध  व ताजा भोजन उपलब्ध करा देने से स्वर्णिम भारत मंच को प्रशासनिक सूचनाएं अधिक मिलती है क्योंकि हर कोई  गर्मी में दाल रोटी खाना पसंद करता है। 

जहाँ से आती  है सूचना वहां पहुंचता है खाना

स्वर्णिम भारत मंच जिला प्रशासन के महत्वपूर्ण इकाई में अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए जितनी सूचना  आती है वँहा खाना पहुंचाता है लॉक डॉउन  में आज 28 अप्रैल तक स्वर्णिम भारत मंच द्वारा  छप्पन हजार पांच सौ अस्सी भोजन पैकेट वितरण किये जा चुके है  जिसके लिए सभी सहयोग करने वाले व दान दाताओं का आभार प्रकट स्वर्णिम भारत मंच करता है।

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