किसानों को उपज का अधिक से अधिक मूल्य दिलवाने के लिए मंडी अधिनियम संशोधित, भारत सरकार के मॉडल मंडी अधिनियम के सभी प्रावधानों को शामिल किया गया, मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों को वीसी के माध्यम से संशोधन की जानकारी

उज्जैन  एक मई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को उनकी फसलों का अधिक से अधिक मूल्य दिलाने के उद्देश्य से मंडी अधिनियम में कई संशोधन किए हैं। इनके लागू हो जाने से अब किसान घर बैठे ही अपनी फसल निजी व्यापारियों को बेच सकेंगे, उन्हें मंडी जाने की बाध्यता नहीं होगी। इसके साथ ही उनके पास मंडी में जाकर फसल बेचने तथा समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने का विकल्प जारी रहेगा। अधिक प्रतिस्पर्धी व्यवस्था बनाकर हमने किसानों को उनकी फसल का अधिक से अधिक मूल्य दिलाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के किसानों को मध्यप्रदेश में मंडी अधिनियम में किए गए संशोधनों की जानकारी दे रहे थे।  इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा कृषि मंत्री श्री कमल पटेल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट आदिम जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री के के सिंह प्रमुख सचिव कृषि श्री अजीत केसरी आदि उपस्थित थे।


किसान घर से ही बेच सकेंगे अपनी उपज, फल, सब्जी


मुख्यमंत्री ने बताया कि अब व्यापारी लाइसेंस लेकर किसानों के घर पर जाकर अथवा खेत पर उनकी फसल खरीद सकेंगे। पूरे प्रदेश के लिए एक लाइसेंस रहेगा, व्यापारी कहीं भी फसल खरीद सकेंगे। इसके साथ ही हमने e-trading व्यवस्था भी लागू की है। इसके अंतर्गत पूरे देश की मंडियों के दाम किसानों को उपलब्ध रहेंगे। वे देश की किसी भी मंडी में जहां उनकी फसलों का अधिक दाम मिले, सौदा कर सकेंगे। 


सौदा पत्रक व्यवस्था के अच्छे परिणाम


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि इस बार हमने प्रदेश में सौदा पत्रक व्यवस्था लागू की। जिसके माध्यम से व्यापारी किसानों से उनकी फसल घर से ही खरीद रहे हैं। मंडियों की खरीद की लगभग 80% खरीदी सौदा पत्रों के माध्यम से हुई है तथा किसानों को अच्छा मूल्य भी प्राप्त हुआ है। इस प्रयोग के परिणाम सकारात्मक होने के कारण हमने मंडी अधिनियम में संशोधन किया है।


9 प्रावधानों में से दो पहले से लागू 7 को अपनाया गया


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि भारत सरकार द्वारा एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टोक मैनेजमेंट एक्ट 2017 (IPLM) मॉडल मंडी अधिनियम राज्यों को भेजकर उसे अपनाने अथवा प्रचलित अधिनियम में संशोधन का विकल्प दिया गया था। अधिनियम को लागू करने के लिए रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से गठित मुख्यमंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा था कि यदि राज्य अपने मौजूदा मंडी अधिनियम में संशोधन करना चाहते हैं तो उन्हें उसमें IPLM के प्रावधानों में से कम से कम 7 को शामिल कर संशोधन करना होगा। चूंकि मध्यप्रदेश में IPLM के प्रावधानों में से दो प्रावधान पहले से ही लागू हैं, अतः अन्य सात प्रावधानों को मंडी अधिनियम में संशोधन के माध्यम से अब प्रदेश में लागू किया गया है।


यह हैं पूर्व के 2 प्रावधान


मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में IPLM के पहले से लागू दो प्रावधान हैं- पहला संपूर्ण राज्य में मंडी शुल्क हेतु कृषि उपज पहली बार खरीदने के समय ही मंडी शुल्क लिया जाएगा। इसके पश्चात पूरे प्रदेश में पश्चातवर्ती क्रय-विक्रय में मंडी शुल्क नहीं लिया जाएगा।  दूसरा प्रावधान है फलों और सब्जियों के विपरण का विनियमन  अर्थात फल और सब्जियों को मंडी अधिनियम के दायरे से बाहर रखा है।


इन सात प्रावधानों पर कानून में संशोधन किया गया है


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि अब सात नए प्रावधानों को मंडी अधिनियम में शामिल किया गया है। ये हैं-
• निजी क्षेत्रों में मंडियों की स्थापना हेतु प्रावधान किया गया है।
• गोदामों साइलो कोल्ड स्टोरेज आदि को भी प्राइवेट मंडी घोषित किया जा सकेगा।
• किसानों से मंडी के बाहर ग्राम स्तर से फूड प्रोसेसर, निर्यातकों, होलसेल विक्रेता व अंतिम उपयोगकर्ताओं को सीधे खरीदने का प्रावधान किया गया है।
• मंडी समितियों का निजी मंडियों के कार्य में कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
• प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड से रेगुलेटरी शक्तियों को पृथक कर संचालक विपणन को दिए जाने का प्रावधान किया गया है। 
• पूरे प्रदेश में एक ही लाइसेंस से व्यापारियों को व्यापार करने का प्रावधान किया गया है। 
• ट्रेनिंग के लिए प्रावधान किया गया है।


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