शिशु एवं बाल रोग विभाग में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित
शिशु एवं बाल रोग विभाग में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित
उज्जैन। शासकीय स्वशासी धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन के शिशु एवं बालरोग विभाग द्वारा 'प्रोटोकॉल फॉर स्वर्णप्राशनÓ विषय पर आयुर्वेद के मूर्धन्य विद्वानों एवं शिशु रोग विशेषज्ञों का अभिमत लेकर एक आदर्श स्वर्णप्राशन कार्यक्रम संचालित किया गया। वेबिनार में मुख्य अतिथि सचिव सह-आयुक्त, आयुष विभाग म.प्र. शासन, डॉ. एम.के. अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में शासन स्तर पर आत्मनिर्भरता के लिये कई कार्यक्रम प्रस्तावित है। म.प्र. के सभी आयुष महाविद्यालयों के चिकित्सालयों एवं ग्रामीण औषधालयों में डॉ. अग्रवाल के माध्यम से स्वर्णप्राशन प्रारंभ कराया गया है। उन्होंने कहा कि कोविड में हमें एक अवसर मिला है। पुष्य नक्षत्र में स्वर्णप्राशन कराने, साथ ही कुपोषण के लिए आयुष के माध्यम से सार्थक प्रयास हो, आरोग्य कषायम-20 का आने वाले समय में क्वारेंटाईन सेंटर्स पर वितरण किया जाये। स्वर्णप्राशन की मॉनीटरिंग, पेरामीटर्स तथा अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण हो तथा पूरे प्रदेश में गुणवत्तायुक्त स्वर्णप्राशन लागू किया जायें। वेबिनार के माध्यम से विचार मंथन होकर कुछ ऐसे मार्गदर्शक बिन्दु निर्धारित करने का उद्देश्य है ताकि स्वर्णप्राशन को वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित किया जा सके।
इस राष्ट्रीय वेबिनार में समन्वयक आयुर्वेद महाविद्यालय उज्जैन तथा सह समन्वयक आयुर्वेद महाविद्यालय ग्वालियर थे। प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. कल्पना पटेल प्रोफेसर एव विभागाध्यक्ष आई.पी.जी.टी. एण्ड आर.ए. गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी जामनगर तथा डॉ. निशा ओझा, एसोसिएट प्रोफेसर एव विभागाध्यक्ष राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर, राजस्थान आमंत्रित थीं। अपने व्याख्यान में डॉ. कल्पना पटेल ने शास्त्रोक्त विधि से ही स्वर्णप्राशन कराये जाने हेतु अपना मत व्यक्त किया। स्वर्णप्राशन कब, क्यों, कैसे और किन्हें कराया जाये इसका उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा - जन्म से 5 वर्ष तक के बच्चों, आचार्य काश्यप के अनुसार लेहन योग्य, अयोग्य, पैरामिटर्स को ध्यान में रखकर तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में ही शासकीय संस्थाओं में कराया जाये। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशा ओझा, मेडम ने एन आई.ए. में स्वर्णप्राशन पर हुए रिसर्च वर्क के आधार पर बताया कि स्वर्णप्राशन का इम्युनोमाड्यूलेटरी इफेक्ट है, यह फी रेडिकल से मुक्त करता है तथा नवजात में सेरेब्रलपाल्सी और ऑटिज्म को प्रीवेट करता है। इसका कोई टॉक्सिक इफेक्ट नहीं पाया गया है। रस तरंगिणी को आधार बनाकर स्वर्णप्राशन किये जाने का उल्लेख किया। वेबिनार के प्रारंभ में स्वागत भाषण एवं अतिथि परिचय डॉ. जी.पी चौरसिया द्वारा किया गया। वेबिनार में कार्यक्रम की समापन टिप्पणी एवं आगंतुक अतिथि को आभार डॉ. वेद प्रकाश व्यास, रीडर एवं विभागाध्यक्ष, बालरोग विभाग द्वारा दिया गया। वेबिनार का संचालन डॉ. गीता जाटव, असिस्टेंट प्रोफेसर स्थानीय महाविद्यालय ने किया। उक्त जानकारी प्रधानाचार्य डॉ. जे.पी. चौरसिया एवं मीडिया प्रभारी डॉ. प्रकाश जोशी ने दी।

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